तहसील में मौजूद हैं ‘सोने’ के चम्मच से दहीं खाने वाले महारथी

तहसील में मौजूद हैं ‘सोने’ के चम्मच से दहीं खाने वाले महारथी

जालन्धर (लखबीर)

कहते हैं कि तहसील एक सोने की खान है पर तहसील हरेक व्यक्ति के लिए सोने की खान नहीं है। इतना जरूर है कि जालन्धर तहसील कुछ चुनिंदा लोगों के लिए सोने की खान ही नहीं बल्कि अल्लादीन का चिराग भी साबित हो चुकी है। जी हां, हम बात कर रहे हैं, उन लोगों की जिन्होंने तहसील के सहारे इतनी माया बटोरी कि रोड़ से करोड़ तक का सफर तय कर लिया, वो भी कुछ ही समय में। ये कोई ओर लोग नहीं बल्कि कुछेक वसीका नवीस हैं। चाहे सरकारी आदेशों अनुसार इनकी फीस कुछ रुपयों में होती है, बावजूद इसके इन पर माया देवी इतनी मेहरबान है कि इसी काम के सहारे करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। यह वसीका नवीस कौन हैं तथा कैसे काम करते हैं, इसका खुलासा भी किया जाएगा। इन वसीका नवीसों ने काली कमाई करके कैसे बड़ी-बड़ी कोठियां-इमारतें, होटल व अवैध कालोनियां बना ली हैं, इसका खुलासा भी किया जाएगा। लोगों की मानें तो कई वसीका नवीस मानते हैं कि उनके रहमों कर्म पर ही तहसील चल रही है।

मशहूर हैं बहुत सारी कंपनियां…

इस काम में पूरी तहसील में जिनकी तूती बोलती है, वह कुछ चुनिंदा लोग ही हैं। इनमें के. एंड कंपनी, बिल्लु बकरा, चांद-सितारा, मुल्तान, बंसरी वाले, काके, गुप्ते जैसे कई कंपनियां 550 रुपए फीस होने के बावजूद ‘सोने’ के चम्मच से दहीं खा रहे हैं। हरेक की पूरी हिस्ट्री लोगों के सामने रखी जाएगी ताकि दूध का दूध व पानी का पानी हो सके।