सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार लॉकडाउन लगाने को तैयार
Delhi government ready to impose lockdown during the hearing on pollution in Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार लॉकडाउन लगाने को तैयार

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार ने दायर हलफनामे में कहा है कि केवल दिल्ली में लॉकडाउन से बात नहीं बनेगी। अगर केंद्र सरकार पूरे एनसीआर में लॉकडाउन लगाने पर विचार कर रही है तो दिल्ली सरकार भी लॉकडाउन के लिए तैयार है। दिल्ली सरकार ने कहा कि लॉकडाउन से प्रदूषण पर ज़्यादा असर नहीं पड़गा। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने कोर्ट में बताया कि उसने प्रदूषण को लेकर कई कदम उठाए हैं, जिसमें स्कूलों-कॉलेजों को 20 नवंबर तक बंद किया है। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि आपने कहा था कि केंद्र सरकार इमरजेंसी मीटिंग कर रही है, उसका क्या हुआ, उसके बारे में बताइएं। जिसपर सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि कल देर रात तक मीटिंग होती रही। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि हरियाणा सरकार ने भी कुछ कदम उठाए हैं। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हमने सुझाव दिया है कि दिल्ली में पार्किंग फीस तीन गुना कर दी जाए, जिससे लोग गाड़ियों को गैर जरूरी काम के लिए न निकलें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को कुछ सुझाव दिए है। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा पॉल्यूशन में पराली जलाने से होने वाला पॉल्युशन मात्र 10% है। उन्होंने कहा हमने दिल्ली सरकार को कहा है कि डीजल जनरेटर पर रोक लगाए। होटल, रेस्तरां में कोयले की भट्टियों पर रोक लगाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि हमने पिछली सुनवाई में कहा था कि स्थिति बहुत खराब है, तत्काल उपाय करने की जरूरत है। आपने जो बताया है, वह सारे उपाय लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन हैं। हमें तत्काल सॉल्यूशन चाहिए। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि तो क्या आप इस बात को मानते हैं कि दिल्ली में पॉल्यूशन के लिए पराली ही जिम्मेदार नहीं है। उसको लेकर बेवजह हाय तौबा मचायी जाती है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हमने जिन तीन और कठोर कदमों के बारे में सोचा है। वे जिन्हें लागू नहीं किया गया है पहला- ऑड-ईवन योजना, दूसरा- दिल्ली में ट्रक के प्रवेश पर प्रतिबंध सबसे गंभीर लॉकडाउन होगा और तीसरा स्कूल बंद कर दिए हैं और लोगों को घर से काम करने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा 75% प्रदूषण तीन कारक उद्योग, धूल और परिवहन के कारण होता है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि आपने क्या कदम उठाया है, आपके पास क्या कोई रिसर्च है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से सड़कों की सफाई को लेकर उठाए गए कदमो के बारे में पूछा। दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप सिर्फ सड़क साफ करने वाली मशीन की संख्या पर कैसे बहस कर सकते हैं सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या सिर्फ 69 मशीन काफी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आप ब्लेम MCD पर डाल रहे है। अगर ऐसा हुआ तो हम यह ऑडिट करेंगे कि आपने स्लोगन पर कितना खर्च किया है। आप रेवेन्यू इकठ्ठा जो कर रहे है, उसका स्लोगन इश्‍तेहार पर कितना खर्च कर रहे है। इसका ऑडिट करने के आदेश देने के लिए हमें मजबूर न करे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि MCD का तो कहना है कि उनके पास सैलरी देने तक के पैसे नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि ये हम नहीं जानते कि आप कैसे करेंगे। पॉल्युशन कंट्रोल होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकार से कहा कि हम आप को फोर्स नहीं कर रहे कि आप किसानों पर पराली जलाने के लिए जुर्माना लगाए। आप किसानों से बात करें, समझायें कि कम से कम एक हफ्ते तक पराली न जलाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा किन इंडस्ट्री को बंद किया जा सकता है, किन गाड़ियों की इंट्री बंद की जा सकती है। किन पॉवर प्लांट को बंद किया जा सकता है और बिजली सप्लाई का अल्टरनेट क्या होगा इन सबके बारे में कल तक बताने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली सरकार के साथ कल मीटिंग करें। पॉल्युशन कंट्रोल के उपायों पर बात करें। मुख्‍य न्यायधीश ने अपने आदेश में कहा कि हलफनामे के मुताबिक, प्रदूषण के मुख्य कारण घूल, ट्रांसपोर्ट, फैक्ट्री आदि है। मैं केंद्र सरकार को आदेश देते हूं कि वह कल आपातकालीन मीटिंग बुलाए, मीटिंग में यूपी पंजाब हरियाणा केके मुख्य सचिव उपस्थित रहे।

 

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